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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की भूमिका: उत्तराखण्ड के परिप्रेक्ष्य में एक अध्ययन
Authors
दीपक नाथ, डॉ. हेमा
Abstract
भारत की राजनीति में क्षेत्रीय दल स्थानीय हितों, सांस्कृतिक पहचान और भाषाई मुद्दों को प्रमुखता देकर राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये दल गठबन्धन सरकारें बनाकर (जैसे वर्तमान एनडीए में टीडीपी, जदयू) केन्द्र राज्य सम्बन्धों को सन्तुलित करते हैं, क्षेत्रीय स्वायत्तता को बढ़ावा देते हैं और राष्ट्रीय दलों के वर्चस्व को चुनौती देते हैं। भारत की राजनीति में क्षेत्रीय दलों (Regional Parties) का महत्व 1960 के दशक के बाद से लगातार बढ़ा है। ये दल केन्द्र सरकार की तानाशाही को रोकते हैं और राज्यों को अधिक स्वायत्तता (Autonomy) देने की माँग करते हैं। भाषाई या जातीय अल्पसंख्यकों के मुद्दों को उठाकर, ये दल हाशिए पर पड़े समुदायों को आवाज देते हैं। उत्तराखण्ड राज्य का गठन ही एक क्षेत्रीय आन्दोलन (उत्तराखण्ड क्रांति दल - UKD) की प्रमुख भूमिका का परिणाम था, जो स्थानीय पहचान और विकास की माँग पर आधारित था। उत्तराखण्ड क्रान्ति दल (UKD) ने पर्वतीय क्षेत्रों की बिशिष्ट समस्याओं जैसे- पलायन, भू-अधिग्रहण, और पहाड़ी संस्कृति के संरक्षण को प्रमुखता से उठाया हैं। क्षेत्रीय दल भारतीय राजनीति में विविधता और संघीय भावना के प्रतीक हैं। उत्तराखण्ड में जहां भौगोलिक परिस्थितियाँ (पहाड़) और मुद्दे (पलायन, विकास) विशिष्ट हैं, क्षेत्रीय दल स्थानीय जरूरतों को प्रमुखता देने और विकास की मुख्यधारा में पहाड़ी संस्कृति को बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं।
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Pages:176-179
How to cite this article:
दीपक नाथ, डॉ. हेमा "भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की भूमिका: उत्तराखण्ड के परिप्रेक्ष्य में एक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 176-179
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