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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा की आवश्यकता एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का योगदान
Authors
सुनीता यादव
Abstract
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) आधुनिक शिक्षा प्रणाली की एक ऐसी मानवीय एवं लोकतांत्रिक अवधारणा है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक बालक को उसकी व्यक्तिगत भिन्नताओं, क्षमताओं तथा आवश्यकताओं के अनुसार समान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। यह शिक्षा व्यवस्था इस सिद्धांत पर आधारित है कि समाज का प्रत्येक बच्चा, चाहे वह शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, श्रवण, दृष्टि अथवा बहुविकलांगता से प्रभावित क्यों न हो, शिक्षा प्राप्त करने का समान अधिकार रखता है। समावेशी शिक्षा न केवल दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ती है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, सामाजिक सहभागिता, आत्मनिर्भरता तथा जीवन कौशल का भी विकास करती है। इसके माध्यम से समाज में समानता, सामाजिक न्याय, सहिष्णुता एवं मानवीय मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।भारतीय संविधान में शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में स्वीकार किया गया है तथा “सभी के लिए शिक्षा” की अवधारणा को सशक्त बनाने हेतु विभिन्न नीतियाँ एवं कार्यक्रम संचालित किए गए हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) ने समावेशी शिक्षा को विशेष महत्व प्रदान करते हुए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि कोई भी बच्चा सामाजिक, आर्थिक अथवा शारीरिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे। नीति में दिव्यांग बच्चों के लिए सुगम (Accessible), समान अवसरयुक्त, बहुभाषिक, लचीली एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षा व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया गया है। इसके अंतर्गत विद्यालयों में बाधारहित अधोसंरचना, प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता, सहायक उपकरणों का प्रयोग, डिजिटल संसाधनों की पहुँच तथा व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों को प्रोत्साहित किया गया है। प्रस्तुत शोध पत्र में दिव्यांग बच्चों की समावेशी शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व का विस्तृत अध्ययन किया गया है। साथ ही, समावेशी शिक्षा के मार्ग में आने वाली प्रमुख चुनौतियों—जैसे संसाधनों की कमी, प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव, सामाजिक पूर्वाग्रह, आर्थिक कठिनाइयाँ तथा विद्यालयी अधोसंरचना की अपर्याप्तता—का विश्लेषण भी किया गया है। शोध पत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा प्रस्तावित विभिन्न प्रावधानों एवं सुधारों का समालोचनात्मक अध्ययन करते हुए यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि यह नीति दिव्यांग बच्चों के शैक्षिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण में किस प्रकार सहायक सिद्ध हो सकती है। यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि समावेशी शिक्षा केवल दिव्यांग बच्चों के विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक समतामूलक, संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की आधारशिला भी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता, शिक्षक प्रशिक्षण तथा सामाजिक जागरूकता के माध्यम से समावेशी शिक्षा के उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सकता है।
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Pages:240-245
How to cite this article:
सुनीता यादव "दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा की आवश्यकता एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का योगदान". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 240-245
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