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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
भारतीय साहित्य एवं कला में राम: अंतः सम्बन्ध
Authors
कविता भारती, हेमलता अग्रवाल
Abstract
राम भारतीय संस्कृति और चित्रकला के लोकप्रिय चरित्र है। साहित्य, चित्र, संगीत, मूर्ति, नाटय आदि के प्रिय विषय राम और राम कथा प्रत्येक युग में प्रासंगिक है। बाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस व विभिन्न क्षेत्रीय रामकथाओं में वर्णित राम का चरित्र उच्चतर मानव मूल्यों का पर्याय है। भारत की विविध कलाओं में उन्हें समाज की शीर्षस्थ विभूति के रूप में चित्रित किया गया है। साहित्य एवं कला में वे पहले ऐसे चरित्र नायक हैं जिनके द्वारा भारत को विश्व पटल पर सांस्कृतिक पहचान प्राप्त हुई है। मध्यकालीन साहित्य एवं कला में राम के विविध रूपों का निरूपण अपने पूर्ण कलात्मक सौन्दर्य के साथ हमें देखने को मिलता है फिर चाहें वह रीतिकाल हो या कला की राजस्थानी, मुगल एवं पहाड़ी शैलियाँ। आधुनिक भारतीय समकालीन कला में राम के विविध रूप हमारे सामने आने प्रारम्भ हुए हैं जिसमें परम्परागत शैलियाँ साथ साथ नवीन प्रयोगात्मक पद्धतियों में भी हमें राम का चित्रण देखने को मिलता है। अभी तक हम प्रायः राम के परम्परागत स्वरूप से ही परिचित रहे हैं परन्तु नयी विधाओं एवं प्रवृत्तियों के आने से कलाकार इस विषय में नवीन कार्य रहे हैं। जो परम्परागत चित्रण से पर्याप्त भिन्न हैं। राम का निरंतर परिवर्तित होता कलात्मक स्वरूप भारतीय कला की विविधता को व्यक्त करता है। राम के कलात्मक स्वरूप में हो रहे नित नवीन परिवर्तन इस विषय को जीवन्तता प्रदान करते हैं।
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Pages:394-397
How to cite this article:
कविता भारती, हेमलता अग्रवाल "भारतीय साहित्य एवं कला में राम: अंतः सम्बन्ध". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 394-397
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