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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
भारतीय किसान एवं विश्व व्यापार संगठन: किसानों को लाभ, हानि एवं वर्तमान स्थिति
Authors
धन राज , डॉ. राम बिनोद रे
Abstract
भारत एक कृषि-प्रधान देश है, जहाँ लगभग आधी जनसंख्या प्रत्यक्ष
या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। 1995 में विश्व व्यापार संगठन (WTO) के गठन
के पश्चात भारत की कृषि नीति, सब्सिडी ढांचे तथा बाजार व्यवहार में व्यापक परिवर्तन
आए हैं। यह शोध पत्र WTO के कृषि समझौते (Agreement on Agriculture) के अंतर्गत भारतीय
किसानों को मिलने वाले संभावित लाभ जैसे निर्यात के नए अवसर, तकनीकी हस्तांतरण एवं
वैश्विक बाजार तक पहुँच तथा हानि जैसे विकसित देशों की उच्च सब्सिडी से उत्पन्न असमान
प्रतिस्पर्धा, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) एवं सार्वजनिक खरीद व्यवस्था पर मंडराता
खतरा आदि का विश्लेषण करता है। साथ ही, यह शोध-पत्र
वर्तमान स्थिति, विशेषकर 13वीं मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC13, अबू धाबी, 2024) में सार्वजनिक
भंडारण (Public Stockholding) के मुद्दे पर भारत के रुख तथा आगे की संभावित दिशा का
विवेचन करता है। शोध में द्वितीयक स्रोतों सरकारी रिपोर्ट, WTO के दस्तावेज़ों तथा
विद्वानों के शोध-पत्रों का उपयोग करते हुए यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भारत को बहुपक्षीय
वार्ताओं में अपने छोटे एवं सीमांत किसानों के हितों की रक्षा हेतु निरंतर एवं संगठित
कूटनीतिक प्रयास करने होंगे।
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Pages:27-30
How to cite this article:
धन राज , डॉ. राम बिनोद रे
"भारतीय किसान एवं विश्व व्यापार संगठन: किसानों को लाभ, हानि एवं वर्तमान स्थिति". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 27-30
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