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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
संस्कृत साहित्य में योग और वैज्ञानिक अनुप्रयोग
Authors
डॉ. कीर्ति कुमार त्रिपाठी, कमलाकर सिंह
Abstract
संस्कृत साहित्य में योग तथा उसके वैज्ञानिक अनुप्रयोगों का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राचीन भारत में उत्पन्न योग आज विश्वभर के लोगों को आकर्षित करता है, और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। योग की उत्पत्ति भारत में पूर्ववैदिक काल में हुई। यह बौद्ध धर्म के साथ अनेक देशों में फैल गया, और अब लगभग पूरा विश्व इससे परिचित है। भारतीय दर्शन में योग का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। सभी मानसिक अवस्थाएँ और घटनाएँ इसमें समाहित थीं। ऋग्वैदिक काल में विश्वामित्र, वामदेव, अत्रि, भरद्वाज और वशिष्ठ जैसे अनेक ऋषि थे। ऋग्वेद के अनुसार, समस्त सृष्टि ब्राह्मणों के कारण अस्तित्व में है, जिन्हें ईश्वर का सृष्टिकर्ता माना गया था। यह माना जाता है कि ईश्वर ने वेदों के माध्यम से अपना ज्ञान प्रकट किया, और ये वेद ब्रह्मांड के परम सत्य का वर्णन करते हैं। प्राचीन भारतीय संस्कृत साहित्य में योग और उसके वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से हम एक नई सामाजिक व्यवस्था का निर्माण कर सकते हैं, जिसमें मानव की आकांक्षाओं की पूर्ति हो सके। यह दर्शन सिखाता है कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य कर्म करना है, न कि संघर्षों से भागना। केवल शिक्षा पर्याप्त नहीं है; उसका उचित उपयोग भी आवश्यक है। योग दर्शन नैतिक विकास पर बल देता है और व्यक्ति को समस्याओं का साहसपूर्वक सामना करने के लिए प्रेरित करता है। आज आवश्यकता है कि पतंजलि योग सूत्र जैसे उपदेशों को उजागर किया जाए, ताकि समाज की निष्क्रियता को समाप्त किया जा सके और उसे नई ऊर्जा प्राप्त हो सके।
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Pages:158-159
How to cite this article:
डॉ. कीर्ति कुमार त्रिपाठी, कमलाकर सिंह "संस्कृत साहित्य में योग और वैज्ञानिक अनुप्रयोग". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 158-159
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