ARCHIVES
VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
ब्रिटिश भारत और तिब्बत : सामरिक एवं व्यापारिक संबंधों का अध्ययन
Authors
रश्मि कुमारी, डॉ. मुकेश कुमार
Abstract
औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश भारत और तिब्बत के मध्य विकसित सामरिक, राजनीतिक, कूटनीतिक तथा व्यापारिक संबंधों का ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। उन्नीसवीं एवं बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशकों में तिब्बत ब्रिटिश साम्राज्य की उत्तर-पूर्वी सीमा सुरक्षा, मध्य एशिया की शक्ति-राजनीति तथा चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया था। ब्रिटिश शासन ने तिब्बत को एक सामरिक 'बफ़र क्षेत्र' के रूप में देखते हुए वहाँ व्यापारिक हितों के विस्तार, सीमा सुरक्षा तथा राजनीतिक प्रभाव स्थापित करने के उद्देश्य से अनेक कूटनीतिक प्रयास, सैन्य अभियान और संधियाँ संपन्न कीं। 1903–04 का यंगहसबैंड अभियान, 1904 की ल्हासा संधि तथा 1914 का शिमला सम्मेलन ब्रिटिश–तिब्बत संबंधों के प्रमुख पड़ाव रहे, जिनका प्रभाव भारत–तिब्बत तथा बाद में भारत–चीन संबंधों पर भी दीर्घकालिक रूप से पड़ा। इसके साथ ही, भारत और तिब्बत के मध्य ऊन, नमक, चाय, पशु-उत्पाद तथा अन्य वस्तुओं का सीमा-पार व्यापार हिमालयी दर्रों के माध्यम से निरंतर संचालित होता रहा, जिसने दोनों क्षेत्रों के आर्थिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ किया। यह अध्ययन औपनिवेशिक अभिलेखों, आधिकारिक दस्तावेजों तथा द्वितीयक ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर यह स्पष्ट करने का प्रयास करता है कि ब्रिटिश साम्राज्य की सामरिक नीतियों, व्यापारिक हितों तथा सीमा-निर्धारण की प्रक्रियाओं ने तिब्बत की राजनीतिक स्थिति और दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय भू-राजनीति को किस प्रकार प्रभावित किया। साथ ही, शोध यह भी विश्लेषित करता है कि औपनिवेशिक काल में निर्मित सीमाएँ, व्यापारिक मार्ग तथा कूटनीतिक व्यवस्थाएँ स्वतंत्रता-उत्तर भारत–तिब्बत एवं भारत–चीन संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को किस प्रकार आकार प्रदान करती हैं। इस प्रकार यह अध्ययन ब्रिटिश भारत और तिब्बत के संबंधों को केवल व्यापार या सामरिक दृष्टि से नहीं, बल्कि औपनिवेशिक कूटनीति, हिमालयी भू-राजनीति, सीमा-निर्माण तथा क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन के व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझने का प्रयास करता है।
Download
Pages:212-218
How to cite this article:
रश्मि कुमारी, डॉ. मुकेश कुमार "ब्रिटिश भारत और तिब्बत : सामरिक एवं व्यापारिक संबंधों का अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 212-218
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

