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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
गुप्तोत्तर भारत में श्रेणियों की राजनीतिक एवं आर्थिक भूमिका : एक विश्लेषण
Authors
डॉ. अनुपम कुमारी
Abstract
गुप्तोत्तर भारत (छठी से बारहवीं शताब्दी ई.) के राजनीतिक एवं आर्थिक इतिहास में श्रेणियों ने उत्पादन, व्यापार, शिल्प, वित्त तथा शहरी अर्थव्यवस्था के संगठन में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस काल में केंद्रीय सत्ता के अपेक्षाकृत कमजोर होने और क्षेत्रीय राज्यों के उदय के साथ श्रेणियाँ केवल आर्थिक संस्थाएँ ही नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन, कर-संग्रह, सार्वजनिक निर्माण, धार्मिक संस्थाओं के संरक्षण तथा राजसत्ता के साथ सहयोगात्मक संबंध स्थापित कर राजनीतिक प्रभाव भी अर्जित किया। व्यापारिक मार्गों के विस्तार, समुद्री वाणिज्य तथा मंदिर-आधारित अर्थव्यवस्था के विकास ने श्रेणियों की गतिविधियों को और सुदृढ़ बनाया। प्रस्तुत शोध-पत्र अभिलेखीय, साहित्यिक एवं पुरातात्त्विक स्रोतों के आधार पर गुप्तोत्तर भारत में श्रेणियों की राजनीतिक एवं आर्थिक भूमिका का विश्लेषण करता है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि श्रेणियाँ तत्कालीन भारतीय समाज में आर्थिक स्थिरता, शहरी विकास, राजस्व व्यवस्था तथा सांस्कृतिक संरक्षण की प्रमुख वाहक थीं और उन्होंने प्रारम्भिक मध्यकालीन भारतीय राज्य एवं अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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Pages:253-259
How to cite this article:
डॉ. अनुपम कुमारी "गुप्तोत्तर भारत में श्रेणियों की राजनीतिक एवं आर्थिक भूमिका : एक विश्लेषण". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 253-259
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