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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
मध्यप्रांत की देशी रियासतों का भू-राजस्व प्रशासन और भूमि बंदोबस्त: नांदगांव एवं खैरागढ़ रियासत के विशेष संदर्भ में (1872-1908)
Authors
डॉ. दीपक वर्मा
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध एवं बीसवीं सदी के आरंभिक वर्षों (1872–1908) के दौरान तत्कालीन मध्यप्रांत (Central Provinces) के छत्तीसगढ़ संभाग की दो प्रमुख सामंती रियासतों — खैरागढ़ एवं राजनांदगांव के भू-राजस्व प्रशासन, बंदोबस्त प्रणालियों, संस्थागत संरचनाओं तथा सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का एक गहन, तुलनात्मक एवं आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासक मिस्टर चैपमैन, मिस्टर इस्मे, मिस्टर टॉवनी तथा भारतीय दीवानों (जैसे खैरागढ़ के सैयद मुहम्मद हुसैन व नारायण राव) के ऐतिहासिक अभिलेखों, बंदोबस्त प्रतिवेदनों तथा गजेटियरों पर आधारित यह अध्ययन दर्शाता है कि किस प्रकार पारंपरिक हल आधारित (नांगर) और पंचायती परामर्श प्रणाली से आधुनिक ब्रिटिश वैज्ञानिक/कैडस्ट्रल सर्वेक्षण एवं मालगुजारी समकक्ष प्रणालियों में संक्रमण हुआ। पेपर में दोनों रियासतों में सीर, सिरहा, लाखाबाटा (पुनर्वितरण), विविध उपकरों (कठेना, बंधोर, बिसहा, टीका), तथा नांदगांव के बैरागी मठों के धार्मिक-आर्थिक प्रभुत्व का सूक्ष्म मूल्यांकन किया गया है। अंततः, अध्ययन यह रेखांकित करता है कि प्रशासनिक आधुनिकीकरण ने जहाँ राज्य की वित्तीय क्षमता में वृद्धि की, वहीं 1890 के दशक के अकाल, कृषक असंतोष और सामाजिक-कृषि संबंधों में गहरे संरचनात्मक परिवर्तन भी उत्पन्न किए।
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Pages:351-355
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डॉ. दीपक वर्मा "मध्यप्रांत की देशी रियासतों का भू-राजस्व प्रशासन और भूमि बंदोबस्त: नांदगांव एवं खैरागढ़ रियासत के विशेष संदर्भ में (1872-1908)". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 351-355
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