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VOL. 12, ISSUE 4 (2026)
अंबेडकर के राजनीतिक विचारों में मानवतावादी आधार
Authors
गुरु प्रसाद राठौर, डॉ रितु सिंह मीना
Abstract
डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का राजनीतिक चिंतन भारतीय समाज की उन संरचनात्मक विषमताओं के विरुद्ध विकसित हुआ, जिन्होंने लंबे समय तक व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता और समान अवसरों को सीमित रखा। उनके विचारों का मूल उद्देश्य केवल राजनीतिक सत्ता में परिवर्तन करना नहीं था, बल्कि ऐसी सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था का निर्माण करना था जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो। अंबेडकर के लिए स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व परस्पर संबद्ध मूल्य थे तथा लोकतंत्र की सफलता इन्हीं के व्यावहारिक समन्वय पर निर्भर करती है (Ambedkar, 1945)।
उनके राजनीतिक दर्शन में मानवतावादी दृष्टि विशेष रूप से सामाजिक न्याय, नागरिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में दिखाई देती है। उन्होंने जाति-व्यवस्था को केवल सामाजिक विभाजन नहीं, बल्कि मानवीय संबंधों को असमान बनाने वाली व्यवस्था के रूप में देखा और इसके उन्मूलन को लोकतांत्रिक समाज की आवश्यक शर्त माना (Ambedkar, 1936)। संविधान-निर्माण के संदर्भ में भी उनकी प्राथमिकता व्यक्ति के अधिकारों की सुरक्षा तथा राज्य-सत्ता को संवैधानिक मर्यादाओं में रखने की थी। उनका लोकतंत्र संबंधों में समानता और सामाजिक उत्तरदायित्व पर आधारित व्यवस्था था, न कि केवल चुनावों तक सीमित शासन-पद्धति (Ambedkar, 1949)।
यह शोध-पत्र अंबेडकर के राजनीतिक चिंतन में निहित मानवतावादी तत्वों का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट करने का प्रयास करता है कि सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व की उनकी अवधारणाएँ समकालीन लोकतांत्रिक समाज के लिए आज भी महत्वपूर्ण वैचारिक आधार प्रस्तुत करती हैं।
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Pages:17-21
How to cite this article:
गुरु प्रसाद राठौर, डॉ रितु सिंह मीना "अंबेडकर के राजनीतिक विचारों में मानवतावादी आधार". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 4, 2026, Pages 17-21
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