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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 2, ISSUE 12 (2016)
सुशासन और उसकी चुनौतियाँ
Authors
डॉ. सी. के. भगत
Abstract
सुशासन का अर्थ होता है अच्छा शासन जिसमें नागरिक चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, समुदाय या वर्ग से आते हो या वह किसी भी लिंग के हो, वह बिना किसी भेद-भाव के अपनी पूर्ण क्षमता का विकास कर सके। चाणक्य ने अपनी पुस्तक अर्थशास्त्र में सुशासन के विषय में राजा के गुणों का वर्णन किया है। उनके अनुसार- ’’अपनी प्रजा की खुशी में उसकी खुशी होती है, उसके कल्याण में अपना कल्याण समझता है। जिसमें उसे खुद को खुशी मिलती है, उसे वह अच्छा नहीं समझता। किन्तु जिस किसी भी बात से प्रजा को खुशी होती है, उसे वे उत्तम समझता है।’’ आचार्य चाणक्य के ये कथन सुशासन की संकल्पना को परिभाषित करते है। ऐसा शासन जहाँ जनता के कल्याण या सुख को ऊपर रखा जाता है। 
परन्तु आज के दौर में सुशासन स्थापित करने में बहुत सारी चुनौतियाँ है, जिसे विस्तार से उल्लेख किया गया है। साथ ही कैसे राज्य में सुशासन लाया जाए इसका भी उल्लेख किया गया है।

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Pages:106-107
How to cite this article:
डॉ. सी. के. भगत "सुशासन और उसकी चुनौतियाँ". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 2, Issue 12, 2016, Pages 106-107
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