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VOL. 5, ISSUE 2 (2019)
असम के पारंपरिक नाट्य रूप अंकिया का वर्तमान स्वरूप
Authors
डॉ. कुमार गौरव मिश्रा
Abstract
अंकिया नाट असम का जनप्रिय पारम्परिक नाट्य रूप है। इसे वैष्णव नाटक भी कहा जाता है। वैष्णव नाटक का आर्विभाव सोलहवीं शताब्दी में मध्ययुगीन भक्ति आन्दोलन की स्निग्ध् छाया में हुआ। इसके आदि प्रणेता प्रसिद्ध वैष्णव संत श्री शंकर देव (1449-1557 ई.) को माना जाता है। उन्होंने समाज में उच्च नैतिक आदर्शों को लोकमंच के द्वारा प्रस्तुत किया। आज भी असम के ग्राम्य अंचलों में ‘अंकिया नाट’ श्रद्धा और भक्ति-भाव के साथ खेले जाते हैं। वर्तमान में अंकिया नाट के कथानक से लेकर प्रस्तुति स्वरूप में परिवर्तन हुआ है हालांकि अंकिया नाट का यह बदलाव अंकिया के मूल स्वरूप को संरक्षित करते हुआ ।
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Pages:140-141
How to cite this article:
डॉ. कुमार गौरव मिश्रा "असम के पारंपरिक नाट्य रूप अंकिया का वर्तमान स्वरूप". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 5, Issue 2, 2019, Pages 140-141
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