ARCHIVES
VOL. 8, ISSUE 1 (2022)
कौटिलीय अर्थशास़्त्र में विधि व्यवस्था
Authors
आयशा फ़ातमी
Abstract
विधि अथवा क़ानून किसी नियम-संहिता को कहा जाता है। समाज को सुचारु रूप से चलाने के लिये ‘विधि-संहिता‘ का होना अत्यन्त आवश्यक है। विधि मनुष्य के आचरण के समान्य नियम होते हैं जो राज्य द्वारा स्वीकृत तथा औपबन्धिक होते हैं। इनका पालन करना आवश्यक होता है और इनका पालन न करने पर ‘दण्ड‘ की व्यवस्था भी विधि में की जाती है। भारतीय व्यवस्थाकारों ने समाज एवं मनुष्य को व्यवस्थित और नियंत्रित रखने के लिये जिन प्रथाओं, परम्पराओं और विधानों को लिपिबद्ध किया, उनमें अर्थशास्त्र में,जो कौटिल्य की महानतम् रचना है, अपराध, दण्ड एवं न्याय संबंधी सभी विधिक कार्य प्रणालियों का विस्तार से वर्णन है। प्रस्तुत शोध-पत्र में कौटिलीय अर्थशास्त्र में विधि व्यवस्था के साक्ष्य एकत्रित करने का प्रयास किया गया है।
Download
Pages:80-85
How to cite this article:
आयशा फ़ातमी "कौटिलीय अर्थशास़्त्र में विधि व्यवस्था ". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 8, Issue 1, 2022, Pages 80-85
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

