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VOL. 9, ISSUE 1 (2023)
अर्थशास्त्र में कौटिल्य के राजत्व का सिध्दान्तः एक अध्ययन
Authors
डॉ. बलभद्र प्रसाद देवांगन, डॉ. पुष्पा देवांगन
Abstract
अर्थशास्त्र के रचयिता एवं भारतीय राजनीति के जनक आचार्य कौटिल्य का भारतीय राजनीतिक चिंतन के क्षितिज पर अद्वितीय स्थान है। अर्थशास्त्र की उपलब्धि ने पाश्चात्य विद्वानों की समस्त भ्रान्त धारणाओं का खण्डन कर दिया। राजनीतिक चिंतन की दृष्टि से हम कौटिल्य को अरस्तू के समकक्ष तथा व्यावहारिक राजनीतिज्ञ की दृष्टि से मैक्यावली के अधिक नजदीक पाते है। ऐतिहासिक दृष्टि से उसका अर्थशास्त्र में राजत्व का सिध्दान्त प्रचलित एवं महात्वपूर्ण है, जिसकी प्रासंगिकता सार्वकालिक है।
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Pages:101-102
How to cite this article:
डॉ. बलभद्र प्रसाद देवांगन, डॉ. पुष्पा देवांगन "अर्थशास्त्र में कौटिल्य के राजत्व का सिध्दान्तः एक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 9, Issue 1, 2023, Pages 101-102
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