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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 10, ISSUE 2 (2024)
बनारसी साड़ी वस्त्र उघोग में महिला श्रमिक और उनके स्वास्थ्य से सम्बन्धित मुद्देः एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण
Authors
शेराज अहमद, नरेश कुमार सोनकर
Abstract
भारत में वर्तमान समय के संदर्भ में भारतीय अर्थव्यवस्था में सूती वस्त्र उद्योग का एक महत्वपूर्ण योगदान है। सूती वस्त्र उद्योग मुख्य दो भागों में विभाजित है। हथकरघा सूती वस्त्र उद्योग और विद्युतकरघा सूती वस्त्र उद्योग। विद्युतकरघा सूती वस्त्र उद्योग, हथकरघा सूती वस्त्र उद्योग का आधुनिकीकरण और विद्युतीकरण का परिणाम है। हथकरघा सूती वस्त्र उद्योग का विद्युतीकरण होने के बाद सूती वस्त्र उद्योग में लागत में कमी और उत्पादन में अत्यधिक तेजी से वृद्वि हुई और साथ ही मजदूरों के मजदूरी में भी कमी हो गयी जिसके कारण परिवार की आय में वृद्वि के लिए महिलाओं कों भी अपने परिवार की सहायता के लिए इस उद्योग में आना पड़ा ताकि उनका जीवन स्तर अन्य दूसरों की तरह बेहतर रहें लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक कारकों के कारण महिलाओं की भागीदारी बाजार तक न हो करके केवल घरेलू श्रमिक के रूप में ही सीमित है। विद्युतकरघे का सूती वस्त्र उद्योग में प्रवेश के बाद महिला श्रमिकों की भागीदारी इस उद्योग में घट रही है। क्योंकि हथकरघें में महिलाएं मुख्यतः बुनाई का कार्य नहीं करती थी लेकिन बुनाई के पहले और बुनाई के बाद का कार्य महिलाओ द्वारा ही किया जाता था। क्योंकि हथकरघें में शारीरीक बल का अत्यधिक उपयोग करना पड़ता था। और महिलाओं कों शारीरिक रूप से कमजोर समझा जाता है। लेकिन विद्युतकरघें में शारीरीक बल की जगह कौशल कार्य करता है। वर्तमान में मशीनीकरण ने महिलाओ से संबंधित सभी कार्यों का मशीनीकरण कर दिया है। इस शोध प्रपत्र का मुख्य उद्देश्य वाराणसी जिले के अलईपुरा क्षेत्र के साड़ी वस्त्र उद्योग में कार्य करने वाली महिलाओं के कार्य के दौरान होने वाली विभिन्न कठिनाईयों और इससे होने वाले स्वास्थ्य सम्बन्धित कारकों का आकलन करना है। अलईपुरा क्षेत्र वाराणसी शहर का एक मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है। यहाँ विद्युतकरघे से अत्यधिक मात्रा में बुनाई का कार्य होता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य अलईपुरा क्षेत्र में कार्य करने वाली महिलाओं की स्वस्थ्य से संबंधित समस्याओं का पता लगाना है। इस शोध प्रपत्र में प्राथमिक आंकड़ों को एकत्र करने के लिए साक्षात्कार अनुसूचि का प्रयोग किया गया है। आंकड़ों के विश्लेशण से यह निष्कर्ष निकलता है कि वर्तमान समय में बुनाई मुख्य रूप से विद्युतकरघे से ही हो रही है। हथकरघा द्वारा वस्त्रों की बुनाई पहले की अपेक्षा बहुत कम हो गयी है। महिलाओं का विद्युतकरघे में आने का मुख्य कारण आर्थिक और वित्तीय आवश्यकता, बेरोजगारी, गरीबी और हथकरघे की अपेक्षा चलाने में आसानी लेकिन महिलाओं की साक्षारता और परिवार का छोटा आकार महिलाओं की इस उद्योग में भागीदारी का प्रमुख दोष है। आंकड़ों के विश्लेशण से यह पता चलता है कि अधिकांश महिलाएं इस उद्योग में होने वाले ध्वनि प्रदूषण से सिरदर्द और विद्युतकरघे के चलने के दौरान उससे निकलने वाले धांगो के छोटे-छोटे टुकड़े से सांस से सम्बन्धित समस्याओं से पीड़ित है। पिछले 4 से 5 वर्षों में विद्युतकरघा क्षेत्र बिजली आपूर्ति, बाजार गिरावट और बुनकरों के पलायन और अन्य राजनैतिक कारणों और 2016 में जब से विमौद्रिकरण और जी.एस.टी लागू हुआ है। तब से वाराणसी के बुनकरों की स्थिती और खराब होती गयी। साथ ही यह व्यवसाय अन्य राजनैतिक कारकों से भी पीड़ित है।
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Pages:25-31
How to cite this article:
शेराज अहमद, नरेश कुमार सोनकर "बनारसी साड़ी वस्त्र उघोग में महिला श्रमिक और उनके स्वास्थ्य से सम्बन्धित मुद्देः एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 10, Issue 2, 2024, Pages 25-31
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