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VOL. 10, ISSUE 2 (2024)
स्नातक स्तर के उच्च एवं निम्न चिंताग्रस्त विद्यार्थियों के समायोजन: एक अध्ययन
Authors
डॉ. पुष्पा देवांगन
Abstract
शिक्षा तथा विकास के क्षेत्र में कम महत्व किशोरावस्था को नहीं दिया जा सकता है यह समय विकास का सबसे कठिन काल होता है। इसलिए यह आवश्यक है कि इस अवस्था में विद्यार्थियों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए। इस अवस्था में उसके अन्तर विभिन्न भावनाओं का जागरण होता है और उसमें विभिन्न क्षेत्रों में जाकर कार्य करने की उत्कंठा पैदा होती है। इस अवस्था में यदि वह अपने को समुचित रूप से विकसित कर लेता है तो उसका भावी जीवन सुखमय होता है तथा उसे समाज एवं वातावरण के साथ समायोजन करने में कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ती है। प्रस्तुत शोध में स्नातक स्तर के कला एवं विज्ञान संकाय के उच्च एवं निम्न चिंताग्रस्त विद्यार्थियों के समायोजन का अध्ययन किया गया है। दत्त संकलन हेतु व्यापक चिंता परीक्षण डॉ. एस. डी. कपूर एवं समायोजन परीक्षण हेतु डॉ. ए. के. पी. सिन्हा एवं डॉ. आर. पी. सिंह का चयन किया गया है। परिणामों के आधार पर उच्च चिंताग्रस्त एवं निम्न चिंताग्रस्त विद्यार्थियों के समायोजन में सार्थक अंतर पाया गया।
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Pages:89-91
How to cite this article:
डॉ. पुष्पा देवांगन "स्नातक स्तर के उच्च एवं निम्न चिंताग्रस्त विद्यार्थियों के समायोजन: एक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 10, Issue 2, 2024, Pages 89-91
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