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VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा लैंगिक विशेषाधिकारों का नेतृत्व
Authors
ज्योति, अजीत सिंह
Abstract
‘‘मै केवल मानव अधिकारो को मान्यता देती हूँ अन्य किसी तरह के अधिकारो को नहीं। मैं पुरुषों के अधिकार और स्त्रियो के अधिकारों के बारे मे कुछ नहीं जानती।‘‘
(एजिलीना ग्रिम्के (1836)
ग्रिम्के का यह वक्तव मानव सभ्यता के इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि मानव अधिकार के बिना कोई भी व्यक्ति गरिमापूर्ण जीवन व्यतीत नहीं कर सकता अतः अधिकार वे है, जो जीवन जीने के लिए प्रदत्त किये जाते है, जब ये अधिकार समाज में महिलाओ को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, राजनैतिक रूप से निर्णय लेने को प्रतिबद्धता प्रदान करते हैं, तो स्टे महिला सशक्तिकरण के नाम से जाना जाता है, क्योंकि महिला मानव सभ्यता की एक केन्द्र बिन्दु है जिसके बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है यदि समाव को विकास क्रम में ऊपर रखना है तो महिलामा को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने की आवश्यकता है।
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Pages:3-7
How to cite this article:
ज्योति, अजीत सिंह "संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा लैंगिक विशेषाधिकारों का नेतृत्व". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 3-7
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