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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
"युवाओं में नशाखोरी का कारण एवं परिणाम: एक अध्ययन"
Authors
जानकी यादव
Abstract
आदिकाल से ही मादक द्रव्यों के व्यसन का रिवाज मनुष्यों मं चला आ रहा है। जिसमें चाहे शराब हो या अन्य मादक पदार्थ क्यों न हो। आर्य लोग सोमरस का पान करते थे।
भारतीयों में तो ‘सुरापान’ को आध्यात्मिकता के साथ जोड़ने का भी मिथक चली आ रही है। अर्थवेद में भांग का प्रयोग ‘विजया’ के रूप में प्रयोग तथा भोज्य रत्नावली चटक संहिता व अन्य प्राचीन आयुर्वेद के ग्रन्थों में सुरा बनाने का विधान भी है।
भारत में मद्यपान एवं मादक द्रव्य व्यसन का प्रयोग इतना बढ़ गया है कि यह जहरीली पदार्थाे से लाखों, करोड़ो रूपये की बिक्री रोज होती है। भारत में लगभग रोज 80 लाख गैलन की बिक्री होती है। सबसे ज्यादा सरकार को यदि राजस्व प्राप्त होता है, तो शराब से तथा अन्य मादक पदार्थों से होता है। मादक पदार्थों के आयात के कारण भी व्यसनी हुए हैं, लोग। आज-कल महाविद्यालयों तथा विष्वविद्यालयों में अध्ययनरत् छात्र-छात्राओं में नशा खोरी ज्यादातर देखने को मिल रहा है। इसका कारण, सामाजिक प्रतिष्ठा, नशा का शिष्टाचार जीवन शैली का प्रतीक बन जाना, हिप्पी संस्कृति, चिंता रहित जीवन जीने की लालसा, मानसिक शांति की खोज, दवाओं के रूप में मनोवैज्ञानिक, आर्थिक, शारीरिक, सामाजिक, मानसिक तनाव, मानसिक विकास, उपचार, पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव सामाजिक संबंधों में बिखराव, पारिवारिक स्नेह का अभाव आदि कारण हैं। इसके बहुत सारे दुष्परिणाम भी हैं - वैयक्तिक विघटन, दुर्घटना, दुर्व्यवहार कार्य क्षमता का प्रभावित होना सामाजिक एवं पारिवारिक विघटन गरीबी, बेरोजगारी, अपराध बाल अपराध, गणिकावृत्ति, आत्महत्या आदि अनेक सामाजिक व्याधिकीय की स्थिति उत्पन्न होती है। मादक द्रव्य व्यसन से व्यक्ति एवं समाज दोनों ही खोखला हो जाता है, अतः सरकार को भी चाहिए कि वह पूर्ण नशा बंदी करा कर देश को बचाने का प्रयास करें।
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Pages:12-14
How to cite this article:
जानकी यादव ""युवाओं में नशाखोरी का कारण एवं परिणाम: एक अध्ययन"". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 12-14
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