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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
शिक्षा का बदलता स्वरूप: गुरुकुल परंपरा से डिजिटल शिक्षा तक
Authors
डॉ राजीव कुमार
Abstract
भारतीय शिक्षा का इतिहास गुरुकुल परंपरा से शुरू होकर आधुनिक डिजिटल शिक्षा तक एक महत्वपूर्ण और गतिशील यात्रा रही है। प्राचीन काल में गुरुकुल प्रणाली छात्रों के समग्र विकास पर केंद्रित थी, जहाँ गुरु-शिष्य का संबंध अत्यंत घनिष्ठ, व्यक्तिगत और आजीवन था। इस परंपरा में ज्ञान, चरित्र-निर्माण, नैतिकता और आध्यात्मिक विकास को समान महत्व दिया जाता था। वर्तमान समय में डिजिटल शिक्षा ने तकनीकी संसाधनों, ऑनलाइन माध्यमों, दूरस्थ शिक्षण और स्व-निर्देशित अधिगम को बढ़ावा दिया है। यह अध्ययन भारत में गुरुकुल से डिजिटल शिक्षा तक के परिवर्तन को व्यवस्थित ढंग से विश्लेषित करता है। गुणात्मक और तुलनात्मक शोध विधि के माध्यम से साहित्य समीक्षा की गई। प्रमुख निष्कर्ष दर्शाते हैं कि शिक्षा के लक्ष्य, शिक्षक की भूमिका, शिक्षण-पद्धति, शिक्षार्थी-शिक्षक संबंध और मूल्य-शिक्षा में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। तथापि, मानवीय संबंध, चरित्र-विकास और नैतिक मूल्यों की आवश्यकता निरंतर प्रासंगिक है। निष्कर्ष में भारतीय शिक्षा को पारंपरिक मूल्य-आधारित शिक्षा और आधुनिक तकनीकी संसाधनों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता है, ताकि एक समग्र और समावेशी शिक्षा व्यवस्था विकसित हो सके।
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Pages:180-184
How to cite this article:
डॉ राजीव कुमार "शिक्षा का बदलता स्वरूप: गुरुकुल परंपरा से डिजिटल शिक्षा तक". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 180-184
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