वर्तमान शोध "दलित महिलाओं की सामाजिक स्थिति एवं उनकी समस्याएँ" पर केंद्रित है। भारतीय समाज में दलित महिलाएँ तिहरे शोषण की शिकार रही हैं—जातिगत भेदभाव, आर्थिक निर्धनता और पितृसत्तात्मक व्यवस्था। यद्यपि भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किए हैं, फिर भी दलित महिलाओं की स्थिति आज भी संतोषजनक नहीं है।इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य दलित महिलाओं की सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का विश्लेषण करना तथा उनकी प्रमुख समस्याओं को पहचानना है। अध्ययन में यह पाया गया कि दलित महिलाएँ शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ी हुई हैं, जिसके कारण उनके रोजगार और आजीविका के अवसर सीमित हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं तक उनकी पहुँच भी कमजोर है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक कुरीतियाँ, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा, यौन शोषण और जातिगत हिंसा उनकी समस्याओं को और गहरा बना देती हैं।
शोध का निष्कर्ष यह है कि दलित महिलाओं की वास्तविक स्थिति में सुधार के लिए केवल कानून और योजनाएँ पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज की मानसिकता में परिवर्तन, शिक्षा का प्रसार और महिलाओं की जागरूकता अनिवार्य है। शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता ही उनके सशक्तिकरण की कुंजी है। यदि दलित महिलाओं को समान अवसर, सुरक्षा और सम्मान मिलेगा तो वे समाज की मुख्यधारा में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर सकेंगी।Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

