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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
बौद्ध धर्म में वर्णित ब्रह्म बिहार की अवधारणा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उसकी सार्थकता
Authors
डॉ. कल्पना सिंह
Abstract
ब्रह्म बिहार बौद्ध धर्म की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो मानसिक शांति, करुणा और सामाजिक सामंजस्य की ओर मार्गदर्शन करती है। यह चार प्रमुख मानसिक अवस्थाओंकृमैत्री (प्रेम), करुणा (सहानुभूति), मुदिता (दूसरों की खुशी में भागीदारी) और उपेक्षा (संतुलन) पर आधारित है, जो व्यक्ति की मानसिक स्थिति को स्थिर और शांत बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। बौद्ध धर्म में ब्रह्म बिहार का अभ्यास आत्मिक उन्नति, शांति और संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है, जिससे समाज में भी प्रेम, सहानुभूति और सामंजस्य की भावना उत्पन्न होती है। वर्तमान समाज में जहां मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, सामाजिक तनाव और वैश्विक असहमति बढ़ रही हैं, ब्रह्म बिहार की अवधारणा अत्यधिक प्रासंगिक हो जाती है। इस शोध का उद्देश्य ब्रह्म बिहार के चार अंगों का विश्लेषण करना और यह समझना है कि ये मानसिक शांति, सामूहिक कल्याण और सामाजिक सद्भाव में कैसे योगदान करते हैं। साथ ही, यह शोध यह भी बताता है कि ब्रह्म बिहार का पालन मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, समाज में शांति और वैश्विक शांति की दिशा में सहायक हो सकता है। यह अवधारणा न केवल व्यक्तिगत जीवन में, बल्कि समाज और विश्व स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव की संभावना को प्रस्तुत करती है।
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Pages:216-218
How to cite this article:
डॉ. कल्पना सिंह "बौद्ध धर्म में वर्णित ब्रह्म बिहार की अवधारणा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उसकी सार्थकता". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 216-218
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