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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
शिक्षा की भूमिका: सशक्त लोकतंत्र के निर्माण एवं संरक्षण में शिक्षा का योगदान
Authors
डॉ. सतीश चन्द
Abstract
लोकतंत्र की सफलता केवल संवैधानिक संस्थाओं अथवा निर्वाचन प्रक्रिया पर निर्भर नहीं करती, बल्कि जागरूक, उत्तरदायी तथा मूल्यनिष्ठ नागरिकों के निर्माण पर आधारित होती है। इस दृष्टि से शिक्षा लोकतांत्रिक समाज के निर्माण एवं संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम है। प्रस्तुत लेख में शिक्षा की भूमिका का विश्लेषण भारतीय लोकतांत्रिक परिप्रेक्ष्य में किया गया है तथा यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व, सहिष्णुता, आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक नेतृत्व तथा सक्रिय नागरिक सहभागिता का विकास करती है। लेख में लोकतांत्रिक नागरिकता, भारतीय संविधान के आदर्शों तथा लोकतांत्रिक संस्कृति के विकास में विद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका का विवेचन किया गया है। विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (छम्च्) 2020 के उद्देश्यों एवं प्रावधानों का विश्लेषण करते हुए यह दर्शाया गया है कि यह नीति अनुभवात्मक अधिगम, बहुविषयक शिक्षा, समावेशिता, डिजिटल साक्षरता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा मूल्य-आधारित शिक्षा के माध्यम से युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रयास करती है। लेख में 2024 के लोकसभा चुनावों, नीति आयोग की अनुशंसाओं तथा समकालीन डिजिटल युग की चुनौतियों के संदर्भ में शिक्षा की प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला गया है। निष्कर्षतः यह प्रतिपादित किया गया है कि गुणवत्तापूर्ण, समावेशी एवं मूल्यपरक शिक्षा ही सशक्त, सहभागी, उत्तरदायी तथा सतत लोकतंत्र की आधारशिला है और विकसित भारत के निर्माण में इसकी भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
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Pages:501-504
How to cite this article:
डॉ. सतीश चन्द "शिक्षा की भूमिका: सशक्त लोकतंत्र के निर्माण एवं संरक्षण में शिक्षा का योगदान". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 501-504
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