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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज का सांस्कृतिक अध्ययन: भाषा, परंपराएँ, जीवन-शैली एवं लोक परंपराओं का विश्लेषण
Authors
बलदाऊ सिंह श्याम
Abstract
छत्तीसगढ़ का आदिवासी समाज अपनी विशिष्ट भाषा, संस्कृति, परंपराओं, रीति-रिवाजों, रहन-सहन, आचार-विचार, पर्व-त्योहार तथा खेलकूद की समृद्ध विरासत के कारण भारतीय सांस्कृतिक विविधता में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रस्तुत शोध पत्र में छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी समुदायों—जैसे गोंड जनजाति, बैगा जनजाति, हल्बा जनजाति तथा मुरिया जनजाति—की सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन शैली का अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन में आदिवासी भाषाओं की मौखिक परंपरा, लोकगीत, लोकनृत्य, धार्मिक मान्यताएँ, पारंपरिक वेशभूषा, खान-पान तथा सामुदायिक जीवन के विभिन्न पक्षों का विश्लेषण किया गया है।शोध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आदिवासी समाज के पर्व-त्योहार, जैसे बस्तर दशहरा और मड़ई उत्सव, उनकी सांस्कृतिक पहचान एवं सामाजिक एकता के प्रमुख आधार हैं। इसके अतिरिक्त पारंपरिक खेलकूद और लोककलाएँ उनके सामुदायिक जीवन में मनोरंजन, शारीरिक क्षमता तथा सामाजिक समन्वय को सुदृढ़ करती हैं। आधुनिकता एवं वैश्वीकरण के प्रभाव से आदिवासी संस्कृति में हो रहे परिवर्तनों तथा उसके संरक्षण की आवश्यकता पर भी विशेष चर्चा की गई है। यह शोध पत्र छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत को समझने एवं संरक्षित करने की दिशा में उपयोगी सिद्ध होगा।
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Pages:235-239
How to cite this article:
बलदाऊ सिंह श्याम "छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज का सांस्कृतिक अध्ययन: भाषा, परंपराएँ, जीवन-शैली एवं लोक परंपराओं का विश्लेषण". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 235-239
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