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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
योग दर्शन में जीवन मूल्य
Authors
डॉ. कीर्ति कुमार त्रिपाठी, प्रतिभा नीरत
Abstract
योग दर्शन ही वास्तविक जीवन मूल्य है। जहाँ से शरीर और मन की क्रियाएँ शुद्ध होती है। इस नैतिक आचरण के लिए महर्षि पतंजलि ने नैतिक नियमों की चर्चा की है। आध्यात्मिक साधना के माध्यम से आचरण की शुद्धता प्राप्त होती है। ये अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह द्वारा जीवन मूल्य निर्धारित होते हैं। वास्तव में योग मार्ग जीवन मूल्यों के विकास के लिए अत्यंत उपयोगी है। ध्यान का महत्व जीवन मूल्यों को सुदृढ़ और विकास के मार्ग में प्रोत्साहित करने के लिए होता है। क्रिया योग वास्तव में निरंतर प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। इस प्रकार सामाजिक विषमताओं का समाधान मानवीय मूल्यों के माध्यम से किया जा सकता है। दार्शनिक दृष्टि से जीवन मूल्यों की चर्चा महर्षि पतंजलि करते हैं। नीतिशास्त्र दर्शन की एक महत्वपूर्ण शाखा है। नीतिशास्त्र और नैतिकता के अध्ययन से हम जीवन मूल्यांे के और अधिक नजदीक पहुँच जाते हैं। जैविक और अतिजैविक मूल्य होते हैं, जिनके अंतर्गत मैंने नैतिक, बौद्धिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय एवं वैश्विक तथ्यों को खोजने का प्रयास करते है। इसी प्रकार के मूल्यों को नैतिक मूल्यों के रूप में समझने का प्रयास किया जाता है।
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Pages:160-161
How to cite this article:
डॉ. कीर्ति कुमार त्रिपाठी, प्रतिभा नीरत "योग दर्शन में जीवन मूल्य". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 160-161
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