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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
बिहार में मानव पूंजी और बेरोज़गारी: कौशल अंतराल एवं रोजगारयोग्यता का एक मूल्यांकन
Authors
डॉ. अजय कुमार
Abstract
मानव पूंजी किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति, उत्पादकता तथा सामाजिक विकास का आधार मानी जाती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी दक्षता एवं व्यावसायिक कौशल में निवेश मानव पूंजी के निर्माण का प्रमुख साधन है, जो श्रम उत्पादकता, रोजगार सृजन तथा सतत आर्थिक विकास को गति प्रदान करता है। भारत के सर्वाधिक युवा राज्यों में से एक बिहार वर्तमान में जनसांख्यिकीय लाभांश के महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहा है, जहाँ कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या का अनुपात अत्यधिक है। इसके बावजूद राज्य में शिक्षित बेरोज़गारी, अल्प-रोज़गार, प्रच्छन्न बेरोज़गारी तथा कुशल श्रमिकों के निरंतर पलायन जैसी समस्याएँ आर्थिक विकास के समक्ष गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। विशेष रूप से शिक्षा के विस्तार के बावजूद रोजगारयोग्यता का निम्न स्तर, उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल का अभाव तथा शिक्षा और श्रम बाज़ार के मध्य असंतुलन राज्य की प्रमुख समस्याओं के रूप में उभरकर सामने आए हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य बिहार में मानव पूंजी, कौशल अंतराल एवं रोजगारयोग्यता के अंतर्संबंधों का विश्लेषण करना तथा औद्योगिक संबंध एवं कार्मिक प्रबंधन के परिप्रेक्ष्य में मानव संसाधन नियोजन, श्रम बाज़ार, औद्योगिक विकास एवं कौशल विकास कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना है। यह अध्ययन मुख्यतः द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है, जिनमें आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण, बिहार आर्थिक सर्वेक्षण, नीति आयोग, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय तथा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्टों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि बिहार में शिक्षा की पहुँच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, किंतु शिक्षा की गुणवत्ता, व्यावहारिक प्रशिक्षण, डिजिटल दक्षता, उद्योग-अनुकूल तकनीकी कौशल तथा उद्योग–अकादमी समन्वय अभी भी अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हो सके हैं, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में शिक्षित युवा बेरोज़गार अथवा अल्प-रोज़गार की स्थिति में हैं। अध्ययन यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि बिहार में रोजगार सृजन की रणनीति केवल सरकारी नौकरियों के विस्तार तक सीमित न रहकर उद्योग–अकादमी सहयोग, स्थानीय औद्योगिकीकरण, कौशल विकास, उद्यमिता संवर्धन तथा प्रभावी मानव संसाधन नियोजन पर आधारित होनी चाहिए। यदि शिक्षा प्रणाली को श्रम बाज़ार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्गठित किया जाए और औद्योगिक निवेश एवं स्थानीय रोजगार के अवसरों का विस्तार किया जाए, तो बिहार अपनी विशाल युवा मानव पूंजी को उत्पादक संसाधन में परिवर्तित कर जनसांख्यिकीय लाभांश का प्रभावी उपयोग करते हुए समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर सकता है।
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Pages:219-225
How to cite this article:
डॉ. अजय कुमार "बिहार में मानव पूंजी और बेरोज़गारी: कौशल अंतराल एवं रोजगारयोग्यता का एक मूल्यांकन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 219-225
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