ARCHIVES
VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
प्राचीन भारतीय समाज के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक जीवन का अध्ययन
Authors
डॉ. बेबी रानी
Abstract
प्राचीन भारतीय समाज का स्वरूप सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्थाओं के क्रमिक विकास का परिणाम था। प्रस्तुत आलेख में प्राचीन भारतीय समाज की प्रमुख विशेषताओं का विश्लेषण करते हुए वर्ण एवं जाति व्यवस्था, परिवार की संरचना, स्त्रियों की स्थिति, विवाह एवं उत्तराधिकार संबंधी मान्यताओं तथा सामाजिक जीवन के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला गया है। प्रारंभिक काल में सामाजिक व्यवस्था अपेक्षाकृत सरल एवं लचीली थी, किंतु समय के साथ वर्ण-व्यवस्था और सामाजिक नियम अधिक जटिल तथा कठोर होते गए। परिवार सामाजिक संगठन की आधारभूत इकाई था और सामाजिक जीवन में धार्मिक परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का विशेष महत्त्व था।
आलेख में प्राचीन भारत की आर्थिक संरचना के अंतर्गत कृषि, पशुपालन, शिल्प और व्यापार की भूमिका का भी विवेचन किया गया है। कृषि उत्पादन के विस्तार, विभिन्न व्यवसायों के विकास तथा विनियम और व्यापार ने समाज के आर्थिक आधार को सुदृढ़ किया। साथ ही बौद्ध एवं जैन परंपराओं सहित विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक परिवर्तनों ने तत्कालीन सामाजिक मान्यताओं को प्रभावित किया। इन परिवर्तनों के फलस्वरूप सामाजिक जीवन में नए विचारों और मूल्यों का विकास हुआ। इस प्रकार प्रस्तुत अध्ययन प्राचीन भारतीय समाज को एक स्थिर व्यवस्था के स्थान पर निरंतर परिवर्तनशील सामाजिक संरचना के रूप में रेखांकित करता है, जिसमें परंपरा और परिवर्तन दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
Download
Pages:447-448
How to cite this article:
डॉ. बेबी रानी "प्राचीन भारतीय समाज के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक जीवन का अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 447-448
Pdf, Certificate, Cover Page, Index Page, Editorial Page, Accept Letter
Please enter the email address corresponding to this article submission.

