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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
बिहार में उर्दू अफसाना निगारी: परंपरा, विकास, सामाजिक सरोकार और बदलते दौर की नई चुनौतियाँ
Authors
Dr. Shaista Nigareena
Abstract
बिहार की उर्दू अफसाना निगारी भारतीय उर्दू साहित्य की उन समृद्ध परंपराओं में शामिल है, जिसने बदलते हुए सामाजिक जीवन, ग्रामीण परिवेश, मानवीय रिश्तों, स्त्री-जीवन, गरीबी, बेरोजगारी, विस्थापन, साम्प्रदायिक सौहार्द, शिक्षा, सामाजिक असमानता और आधुनिकता के संघर्ष को अपनी रचनात्मक संवेदना का विषय बनाया। बिहार की धरती पर उर्दू भाषा और साहित्य का विकास केवल भाषाई प्रक्रिया नहीं रहा, बल्कि यह विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संवाद से निर्मित एक व्यापक साहित्यिक अनुभव रहा है। इसी वातावरण में उर्दू अफसाना निगारी ने जन्म लिया और धीरे-धीरे एक ऐसी विधा के रूप में विकसित हुई जिसने आम आदमी के जीवन को साहित्य के केंद्र में स्थापित किया। बिहार के अफसाना निगारों ने महलों और अभिजात जीवन की दुनिया से आगे बढ़कर गांवों की गलियों, खेतों, मजदूरों की बस्तियों, मध्यमवर्गीय परिवारों, महिलाओं की पीड़ा, युवाओं की बेचौनी और सामाजिक परिवर्तन की आकांक्षा को कहानी का विषय बनाया। बिहार की उर्दू कहानी की विशेषता उसका यथार्थबोध, मानवीय संवेदना, स्थानीय जीवन से गहरा जुड़ाव और सामाजिक सरोकार है। समय के साथ अफसाना निगारी के विषय, भाषा, शिल्प और तकनीक में भी परिवर्तन आया। प्रगतिशील आंदोलन ने सामाजिक यथार्थ और वर्गीय चेतना को मजबूती दी तो बाद के दौर में अस्तित्वबोध, मनोवैज्ञानिक संघर्ष, स्त्री अस्मिता, सांप्रदायिक तनाव, विस्थापन और बदलते पारिवारिक संबंध कहानी के महत्वपूर्ण विषय बने। आज डिजिटल युग में उर्दू अफसाना निगारी के सामने पाठक-वर्ग के बदलते स्वरूप, प्रकाशन संकट, भाषा की नई चुनौतियों, सोशल मीडिया, ई-पुस्तकों, डिजिटल साहित्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे नए प्रश्न मौजूद हैं। फिर भी बिहार की उर्दू अफसाना निगारी की सबसे बड़ी ताकत उसकी जीवंत सामाजिक संवेदना और समृद्ध साहित्यिक विरासत है। आवश्यकता इस बात की है कि इस विरासत को केवल अतीत की स्मृति बनाकर न छोड़ा जाए, बल्कि नई पीढ़ी, नए विषयों और नई तकनीक के साथ जोड़कर उसे भविष्य की रचनात्मक शक्ति बनाया जाए।
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Pages:442-446
How to cite this article:
Dr. Shaista Nigareena "बिहार में उर्दू अफसाना निगारी: परंपरा, विकास, सामाजिक सरोकार और बदलते दौर की नई चुनौतियाँ". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 442-446

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बिहार में उर्दू अफसाना निगारी: परंपरा, विकास, सामाजिक सरोकार और बदलते दौर की नई चुनौतियाँ | International Journal of Humanities and Social Science Research