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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 12, ISSUE 4 (2026)
भारत की अखंडता एकता की पूंजी
Authors
डॉ सुमन यादव
Abstract
यह लेख, भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं का एक व्यापक अवलोकन प्रदान करता है। इसकी शुरुआत भारत के विविध परिदृश्यों और परंपराओं की स्वीकृति के साथ होती है, जो इसकी सांस्कृतिक विरासत की गहराई पर जोर देती है। अन्वेषण में ऐतिहासिक विरासत, आध्यात्मिकता और धर्म, पाक प्रसन्नता, कला और शिल्प कौशल, भाषा और साहित्य और सामाजिक रीति-रिवाज शामिल हैं। प्रत्येक खंड प्राचीन सभ्यताओं से लेकर समकालीन सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों तक भारत के अद्वितीय योगदान पर प्रकाश डालता है। लेख इस बात पर जोर देते हुए समाप्त होता है कि भारतीय संस्कृति की समृद्धि लगातार विकसित हो रही है, जो परंपरा को आधुनिकता के साथ जोड़ती है, जिससे यह एक आकर्षक और बहुआयामी पाठ बन जाता है।
भारतीय समाज नवीन व आधुनिकत्‍म फैशन के साथ-साथ सदियों पुराने रीति-रिवाजों और परंपराओं में डूबा हुआ है जो विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में भिन्न-भिन्न हैं। शादियों के रंगीन और जीवंत उत्सवों से लेकर धार्मिक समारोहों की गंभीरता तक, ये रीति-रिवाज देश के सामाजिक ताने-बाने का निर्माण करते हैं। संयुक्त परिवार प्रणाली, बड़ों का सम्मान और 'अतिथि देवो भव' (अतिथि भगवान है) की अवधारणा सामाजिक लोकाचार का अभिन्न अंग हैं। भारतीय संस्कृति के पहलू स्वयं राष्ट्र की तरह ही विविध हैं। इस लेख में मैंने केवल विषय की सतह को ही खंगाला है, जबकि उल्लिखित प्रत्येक पहलू की अंनत तह और गहराई मे उतरने की आवश्‍यकता है। भारत की सांस्कृतिक समृद्धि दिनों-दिन विकसित हो रही है, परंपरा को आधुनिकता के साथ मिश्रित कर रही है, और भारतीय संस्कृति की जीवंत और बहुआयामी टेपेस्ट्री की खोज करने वालों के लिए आकर्षण का एक अंतहीन स्रोत भी।

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Pages:1-6
How to cite this article:
डॉ सुमन यादव "भारत की अखंडता एकता की पूंजी". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 4, 2026, Pages 1-6

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