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VOL. 12, ISSUE 4 (2026)
सीकर जिले के लोकगीतों में लोकस्मृति, मौखिक इतिहास और सामुदायिक पहचान: एक ऐतिहासिक अध्ययन
Authors
सुमन भैरी, डॉ. रवि
Abstract
लोकगीत किसी समाज की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के साथ-साथ उसकी ऐतिहासिक स्मृति, सामुदायिक अनुभवों और परंपरागत ज्ञान के महत्त्वपूर्ण संवाहक होते हैं। राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं, स्थानीय भाषिक अभिव्यक्तियों, धार्मिक आस्थाओं, कृषि-आधारित जीवन-पद्धति और लोककलाओं के लिए जाना जाता है। सीकर जिला इस क्षेत्र का एक महत्त्वपूर्ण भाग है, जहाँ लोकगीतों का अध्ययन स्थानीय इतिहास और सांस्कृतिक निरंतरता को समझने की संभावनाएँ प्रस्तुत करता है। प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य सीकर जिले के लोकगीतों को लोकस्मृति, मौखिक इतिहास तथा सामुदायिक पहचान के परस्पर संबंधित स्रोतों के रूप में समझना है। इसमें लोकगीतों की ऐतिहासिक उपयोगिता, मौखिक परंपरा की प्रकृति, स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों की भूमिका, पीढ़ियों के बीच सांस्कृतिक ज्ञान के हस्तांतरण तथा आधुनिक संचार माध्यमों के प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में ऐतिहासिक, विश्लेषणात्मक एवं व्याख्यात्मक पद्धति अपनाई गई है। राजस्थान की लोकसंस्कृति से संबंधित प्रकाशित साहित्य को आधार बनाते हुए सीकर जिले के लोकगीतों के व्यवस्थित क्षेत्रीय अध्ययन की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है। शोध का केंद्रीय तर्क यह है कि लोकगीतों को केवल मनोरंजन अथवा संगीत की विधा के रूप में सीमित नहीं किया जा सकता। वे समुदायों द्वारा अतीत को याद करने, स्थानीय अनुभवों को अर्थ देने तथा सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की प्रक्रिया में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तथापि, लोकगीतों में व्यक्त स्मृतियों को प्रमाणित इतिहास मानने से पहले उनका अन्य ऐतिहासिक स्रोतों से तुलनात्मक परीक्षण आवश्यक है।
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Pages:45-48
How to cite this article:
सुमन भैरी, डॉ. रवि "सीकर जिले के लोकगीतों में लोकस्मृति, मौखिक इतिहास और सामुदायिक पहचान: एक ऐतिहासिक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 4, 2026, Pages 45-48
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